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Bihar News: बिहार में 11.18 लाख से ज्यादा परिवारों को मिलेगा पक्का घर, शिवराज सिंह चौहान ने किया बड़ा ऐलान

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में 11.18 लाख से अधिक गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिलेगा, पटना में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया बड़ा ऐलान।

पटना, 20 अगस्त। बिहार के गरीब परिवारों के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़ी आवासीय सौगात का ऐलान किया गया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्य में कच्चे मकानों में रहने वाले 11.18 लाख से अधिक परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान का लाभ दिया जाएगा। इन लाभार्थियों को आवास की स्वीकृति से संबंधित पत्र सौंपे जाएंगे।

पटना पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हर गरीब परिवार को पक्की छत देने का लक्ष्य रखा गया है। बिहार में नए आवासों की स्वीकृति को उन्होंने गरीब परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाला कदम बताया।

11 लाख से ज्यादा परिवारों को आवास का लाभ

शिवराज सिंह चौहान ने पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान बिहार के लिए आवास योजना को लेकर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य के उन परिवारों को अब पक्के घर की सुविधा मिलेगी, जो अभी तक कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, 11 लाख से अधिक घरों की स्वीकृति बिहार के जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत है। उनका कहना था कि पक्का मकान मिलने से गरीब परिवारों को सुरक्षित छत के साथ अपने घर का सपना पूरा करने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना को गरीब कल्याण से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार का प्रयास है कि देश में कोई गरीब परिवार पक्के घर से वंचित न रहे।

सम्राट चौधरी ने बताया इसे ऐतिहासिक कदम

पटना के बापू सभागार में ग्रामीण विकास विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी आवास योजना को लेकर सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं। उन्होंने शिवराज सिंह चौहान के बिहार दौरे और नए आवासों की स्वीकृति को महत्वपूर्ण बताया।

सम्राट चौधरी ने कहा कि उन्होंने इंदिरा आवास योजना की शुरुआत के दौर को भी देखा है। उनके मुताबिक 1986 से 2014 तक बिहार में बड़ी संख्या में गरीब परिवार पक्के मकान से वंचित रहे।

2014 के बाद 50 लाख आवास का दावा

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बिहार में अब तक दिए गए आवासों को लेकर भी आंकड़े सामने रखे। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 से 2026 तक बिहार में करीब 50 लाख गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराया गया है।

सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि पिछले दो वर्षों में करीब 19 लाख परिवारों को आवास उपलब्ध कराने का काम हुआ है। उन्होंने बताया कि इस योजना के लिए करीब 16 हजार करोड़ रुपये बिहार की जनता के लिए समर्पित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, इस राशि में राज्य सरकार की भी हिस्सेदारी है और करीब 40 प्रतिशत राशि बिहार सरकार की ओर से दी जाती है।

किसानों के लिए भी केंद्रीय मंत्री ने कही बड़ी बात

शिवराज सिंह चौहान ने केवल आवास योजना की ही बात नहीं की, बल्कि किसानों से जुड़ी योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को अपनाने का फैसला किया है।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, फसल को नुकसान होने की स्थिति में पात्र किसानों को योजना के प्रावधानों के तहत क्षतिपूर्ति मिल सकेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान यानी PM-AASHA के तहत बिहार में मसूर की खरीद का भी जिक्र किया।

किसान ID को लेकर बिहार की तारीफ

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने बिहार में किसान आईडी बनाए जाने की प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि किसान आईडी तैयार करने के मामले में बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।

केंद्र सरकार की ओर से कृषि क्षेत्र में डिजिटल पहचान और योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। किसान आईडी को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विजय सिन्हा बोले- जमीन पर उतर रहा डबल इंजन सरकार का दावा

बिहार सरकार में मंत्री विजय सिन्हा ने भी कार्यक्रम के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के बीच तालमेल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विचार का असर जमीन पर दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के साथ बिहार में लाखों नए परिवारों के लिए पक्के मकान की व्यवस्था राज्य के विकास में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।

गरीब परिवारों के लिए आवास क्यों अहम?

बिहार के ग्रामीण इलाकों में आज भी कई परिवार कच्चे या असुरक्षित मकानों में रहते हैं। बारिश, बाढ़, तेज गर्मी और ठंड के दौरान ऐसे परिवारों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ता है।

पक्का घर मिलने से परिवार को सुरक्षित छत मिलने के साथ बच्चों की पढ़ाई, घरेलू सामान की सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता जैसे कई स्तरों पर फायदा मिल सकता है। यही वजह है कि ग्रामीण विकास योजनाओं में आवास को प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा जाता है।

हालांकि, किसी भी आवास योजना की सफलता केवल स्वीकृति पत्र जारी होने से नहीं, बल्कि पात्र परिवार तक समय पर राशि पहुंचने और गुणवत्तापूर्ण निर्माण पूरा होने से तय होती है।

अब लाभार्थियों तक समय पर पहुंचे सहायता

11.18 लाख से ज्यादा नए आवासों की स्वीकृति के बाद अगली चुनौती इनके निर्माण को समय पर पूरा कराने की होगी। लाभार्थियों को किस्तों का भुगतान, जमीन और निर्माण से जुड़ी समस्याओं का समाधान तथा निर्माण की निगरानी महत्वपूर्ण होगी।

सरकार के सामने यह भी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे और किसी भी स्तर पर बिचौलियों की भूमिका न बने।

फिलहाल केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के ऐलान से बिहार के लाखों गरीब परिवारों को पक्के घर की उम्मीद मिली है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इसे गरीब कल्याण और बिहार के विकास से जोड़ते हुए केंद्र के साथ मिलकर काम जारी रखने की बात कही है।

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आवास की घोषणा के बाद असली चुनौती क्रियान्वयन की

11.18 लाख से अधिक नए आवासों की स्वीकृति का ऐलान निश्चित रूप से बिहार के गरीब परिवारों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। लेकिन इस घोषणा का वास्तविक लाभ तभी दिखाई देगा जब स्वीकृत आवास जमीन पर बनकर तैयार हों।

आवास योजना में सबसे महत्वपूर्ण चरण लाभार्थी के चयन से लेकर अंतिम निर्माण तक का होता है। ग्रामीण इलाकों में जमीन, दस्तावेज, बैंक खाते, निर्माण सामग्री और किस्तों के भुगतान जैसी कई व्यावहारिक समस्याएं सामने आती हैं। इसलिए प्रशासन को केवल लक्ष्य पूरा करने के बजाय हर लाभार्थी की स्थिति पर नजर रखनी होगी।

सरकार यदि समय पर राशि उपलब्ध कराती है और स्थानीय स्तर पर आने वाली परेशानियों का समाधान करती है तो लाखों परिवारों की जिंदगी में बड़ा बदलाव आ सकता है। पक्का घर गरीब परिवार के लिए केवल चार दीवारें नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और भविष्य की स्थिरता का आधार होता है।

अब बिहार के इन 11.18 लाख से अधिक परिवारों की नजर इस बात पर होगी कि स्वीकृति पत्र मिलने के बाद उनके खाते में सहायता कब पहुंचती है और उनका अपना पक्का घर कब तैयार होता है।

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